देश में तुअर दाल की कीमतों में बढ़ोतरी होते ही तुअर कतली की मांग बढ़ गई है। इसके साथ ही गृहिणियों का भी तुअर के प्रति एटीट्यूड बदल गया है और उसे काजू-बादाम के साथ सम्मानजनक स्थान पर बैठा दिया गया है। होटलों की ग्रेवी में तुअर दाल का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा है कि तुअर के अच्छे दिन आ गए। ऐसे ही अच्छे दिन सभी के आएंगे। देशभर से आ रहीं खबरों के अनुसार तुअर कतली ने काजू कतली को पीछेछोड़ दिया है। खासकर नेताओं के घरों में पहुंचाए जाने वाले पैकेटों में तुअर कतली ही पसंद की जा रही है। छप्पन भोग मिष्ठान्न भंडार के राजू भंडारी ने कहा, ‘मिठाइयों में ड्रायफ्रूट्स के स्थान पर हमने तुअर दाल का प्रयोग शुरू किया है।’ उन्होंने यह भी कहा कि इस आरोप में कोई दम नहीं है कि दालों की कीमतों में बढ़ोतरी होने से आम जनता परेशान है। हमारे पास काजू कतली लेने जो जनता आती है, उस पर कोई असर नहीं पड़ा है और अब वह मजे में तुअर कतली खरीद रही है। किचन में भी तुअर दाल की प्रतिष्ठा बढ़ गई है। उसे बड़ेडिब्बों से निकालकर कॉम्पैक्ट और अच्छी क्वालिटी के छोटेडिब्बों में भरकर काजू-बादाम-चिरौंजी के पास विराजमान कर दिया गया है। एक गृहिणी शर्मिष्ठा शर्मा ने बताया, ‘मेरा बेटा खीर की डिमांड कर रहा था। तो आज मैंने बादाम-तुअर खीर बनाई है।’ उधर, होटलों ने भी अपनी विशेष महंगी सब्जियों में तुअर की ग्रेवी डालनी शुरू कर दी है। चांदनी चौक स्थित रंगमहल होटल के शेफ राज बिहारी ने बताया कि हम काजू-खसखस के स्थान पर तुअर की ग्रेवी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे हमारे ग्राहक काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंने काजू करी की तर्ज पर ‘तुअर करी’ डिश भी बनाई है।
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