शुक्रवार की दोपहर को सरकारी गलियारों में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सरकारी दफ्तर के एक बाबू ने एक आम आदमी से मुस्कुराकर बात कर ली। बाबू ने उस आम आदमी का काम नियमानुसार बगैर कुछ लिए-दिए खुशी-खुशी करना भी स्वीकार कर लिया। मुख्यमंत्री ने इसे अपने दस साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है। उन्होंने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा, ‘इससे अच्छे दिन और क्या होंगे!’ हालांकि सरकारी बाबुओं-अफसरों के एक संगठन ने इस दिन को ‘काला दिन’ करार दिया है। अशांतिपुरम निवासी आम आदमी वैभव शर्मा ने बताया कि वे किसी काम से एक सरकारी दफ्तर गए थे। वहीं पर उनसे प्रदीप यादव नामक एक बड़े बाबू (परिवर्तित नाम) ने हंसकर बात की और कहा कि वे उनका काम कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि काम करना तो उनकी जिम्मेदारी है। इस काम के लिए तो उन्हें वेतन मिलता है। वैभव ने भावुक होते हुए कहा, ‘मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे। ऐसे सरकारी बाबू तो सदियों में पैदा होते हैं।’ इस घटना पर जहां प्रदेशवासी खुश हैं वहीं बाबुओं के संगठन ने इसे काला दिन बताते हुए उस बाबू का बॉयकॉट करने की घोषणा की है। अखिल भारतीय सरकारी बाबू-अफसर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री बेकामबाबू त्रिपाठी ने एक बयान में कहा, ‘उस बाबू ने बाबू बिरादरी की नाक काटने का काम किया है। उसकी जितनी निंदा की जाए कम है। सरकारी बाबू और अफसर आम जनता के काम करके उन पर एहसान करते हैं। हम सरकार से इस तरह के गैर जिम्मेदार बाबू को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हैं
Monday, 3 August 2015
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